दिल के रोगी के लिए नयी चिकित्सा प्रणाली है वेंटिक्युलर असिस्ट डिवाइस

सेमिनार में उपस्थित कोलकाता से आर्य हृदय रोग विशेषज्ञ व अन्य चिकित्सक, संवाददाता भागलपुर
हैं, इसकी वजह गलत जीवन शैली है.
लोग कम उम्र में बीपी, मोटापा, तनाव आश्रय नर्सिंग होम तिलकामांझी में समेत अन्य बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं, रविवार को आरएन टैगोर अस्पताल जिसको परिणाम दिल के रोग के रूप में कोलकाता से आये हृदय रोग विशेषज्ञ सामने आता है. ऐसे में लोग अगर अपने की टीम ने शिविर लगाया. सीनियर दिनचर्या में परिवर्तन करें, तो स्वस्थ रह कंसल्टेंट कॉर्डियक सर्जन डॉ सकते हैं. प्रत्येक आदमी कम से कम ललित कपूर एवं सीनियर कंसल्टेंट आधा घंटे टहले, संतुलित भोजन करें कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ देवाशीष मित्रा और तले भोजन से दूर रहे. ने 40 से ज्यादा मरीजों की जांच कर हृदय रोग के सर्जरी के लिए एल वैड जरूरी सलाह दी. इसके बाद कचहरी कारगर : डॉ ललित कपूर चौक स्थिति एक होटल में सेमिनार सर्जरी फॉर हार्ट फेल्योर विषय पर का आयोजन किया गया, जिसकी कोलकाता से आये सीनियर कंसल्टेंट अध्यक्षता डॉ हेमशंकर शर्मा ने की. कॉर्डियक सर्जन डॉ ललित कपूर ने बीपी और अनियमित जीवन शैली बना कहा कि आज अगर कोई मरीज हार्ट रहा है दिल का रोगी : डॉ देवाशीष ट्रांसप्लांट कराता है, तो इसमें 10 से डॉ देवाशीष मित्रा ने कहा कि पहले 60 लाख रुपये का खर्च आता है. इस लोग 50 से 60 वर्ष में दिल की बीमारी सर्जरी से 84 प्रतिशत मरीज अगले दो से ग्रसित होते थे. आज लोग 25 से 30 साल तक आराम से जीवन गुजार सकते। साल में दिल की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं, जो हर मरीज के लिए संभव नहीं है,

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